जैसलमेर में हेलिबोर्न सर्वे से मिले 64 भूजल भंडार, सूखा प्रभावित इलाकों को राहत

Prem Chand bhati

जैसलमेर की जमीन में मिले पानी के 64 भूजल भंडार, सूखा प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत

हेलिबोर्न सर्वे में बड़ा खुलासा, 500 मीटर गहराई तक मिले भूजल के संकेत

जैसलमेर:
राजस्थान के सबसे सूखा प्रभावित जिले जैसलमेर के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जिले में किए गए हेलिबोर्न जियोफिजिकल सर्वे में 64 स्थानों पर भूजल उपलब्धता की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं। यह खोज उन इलाकों में की गई है, जहां वर्षों से पारंपरिक तरीकों से पानी नहीं मिल पा रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन भूजल स्रोतों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया गया तो पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण और मरुस्थलीय क्षेत्रों को स्थायी राहत मिल सकती है।


क्या है हेलिबोर्न जियोफिजिकल सर्वे?

हेलिबोर्न जियोफिजिकल सर्वे एक अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें हेलीकॉप्टर के माध्यम से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक उपकरणों की सहायता से जमीन के भीतर मौजूद संरचनाओं का अध्ययन किया जाता है।

इस तकनीक से जमीन के भीतर करीब 500 मीटर की गहराई तक यह पता लगाया जा सकता है कि वहां पानी मौजूद है या नहीं, पानी मीठा है या खारा, और उसकी मात्रा कितनी हो सकती है।


किन क्षेत्रों में मिले भूजल के संकेत?

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र सहित कई ऐसे इलाकों में भूजल के संकेत मिले हैं, जहां पहले पानी की उपलब्धता लगभग असंभव मानी जाती थी।

फलसूंड, छायन, धुडसर और राजगढ़ जैसे क्षेत्रों में यह खोज विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताई जा रही है।


64 भूजल स्थलों का संक्षिप्त विवरण

बिंदु विवरण
सर्वे तकनीक हेलिबोर्न जियोफिजिकल सर्वे
कुल चिन्हित भूजल स्थल 64
अधिकतम जांच गहराई लगभग 500 मीटर
मुख्य क्षेत्र पोकरण व आसपास के इलाके
संभावित उपयोग पेयजल, पशुपालन, सीमित कृषि

सूखा प्रभावित इलाकों को क्या मिलेगा लाभ?

इन भूजल स्रोतों की पहचान से जैसलमेर के सूखा प्रभावित गांवों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • पेयजल की स्थायी व्यवस्था
  • पशुपालकों के लिए जल संकट से राहत
  • सीमित सिंचाई की सुविधा
  • ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी

जल संरक्षण और संतुलित उपयोग जरूरी

भूजल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूजल मिलने के बाद भी अंधाधुंध दोहन से बचना आवश्यक है।

यदि रिचार्ज सिस्टम, वर्षा जल संचयन और नियंत्रित उपयोग पर ध्यान दिया गया, तो ये जल स्रोत लंबे समय तक उपयोगी बने रह सकते हैं।


आगे क्या होगा?

सर्वे की रिपोर्ट अब जिला प्रशासन और भूजल विभाग को सौंप दी गई है। आने वाले समय में इन स्थलों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत ट्यूबवेल और हैंडपंप लगाने की योजना बनाई जा सकती है।

इन भूजल स्रोतों को जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।


निष्कर्ष

जैसलमेर की जमीन में मिले 64 भूजल भंडार सूखा प्रभावित मरुस्थलीय जिले के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। यदि इनका वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग किया गया, तो आने वाले वर्षों में जल संकट से स्थायी राहत संभव हो सकेगी।

— NewsExcel Media | Water & Science Report

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