गो-तस्करी रैकेट के खिलाफ ओडिशा पुलिस की बड़ी कार्रवाई
200 बैंक खाते फ्रीज, करोड़ों की नकदी और वाहन जब्त; आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार
भुवनेश्वर:
ओडिशा पुलिस ने संगठित गो-तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक और रणनीतिक कार्रवाई करते हुए अपराधियों की आर्थिक संरचना पर सीधा प्रहार किया है। इस कार्रवाई के तहत 200 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जबकि करोड़ों रुपये की नकदी और तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त किए गए हैं।
यह ऑपरेशन केवल धरपकड़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तस्करी से जुड़े वित्तीय लेन-देन, डिजिटल ट्रांजैक्शन और मनी ट्रेल की गहन जांच के बाद अंजाम दिया गया।
गो-तस्करी: केवल अपराध नहीं, एक संगठित आर्थिक नेटवर्क
गो-तस्करी को लंबे समय तक केवल अवैध परिवहन या कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन हालिया जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है, जिसमें परिवहन, वित्त, फर्जी खातों और हवाला जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
ओडिशा पुलिस की जांच में सामने आया कि तस्करी से अर्जित धन को कई छोटे-छोटे बैंक खातों में बांटकर रखा जाता था, ताकि रकम एक जगह केंद्रित न दिखे और जांच से बचा जा सके।
200 बैंक खाते फ्रीज: कार्रवाई का सबसे अहम पहलू
इस पूरे ऑपरेशन का सबसे निर्णायक कदम रहा 200 बैंक खातों को फ्रीज करना। पुलिस के अनुसार, ये खाते सीधे या परोक्ष रूप से गो-तस्करी से जुड़े लेन-देन में इस्तेमाल हो रहे थे।
इन खातों में:
- तस्करी से प्राप्त धन जमा किया जाता था
- वाहनों की खरीद-फरोख्त की जाती थी
- नेटवर्क के सदस्यों को भुगतान किया जाता था
- डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का उपयोग होता था
पुलिस ने बैंकिंग एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों की मदद से इन खातों की पहचान की।
नकदी और वाहनों की जब्ती: जमीनी स्तर पर कार्रवाई
वित्तीय कार्रवाई के समानांतर पुलिस ने विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की नकदी जब्त की। इसके साथ ही गो-तस्करी में प्रयुक्त:
- भारी ट्रक
- पिकअप वाहन
- फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहन
भी जब्त किए गए। इन वाहनों का इस्तेमाल अंतरराज्यीय स्तर पर पशुओं की अवैध ढुलाई के लिए किया जा रहा था।
कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण
| कार्रवाई का पहलू | विवरण |
|---|---|
| फ्रीज किए गए बैंक खाते | 200 |
| जब्त नकदी | करोड़ों रुपये (अनुमानित) |
| जब्त वाहन | ट्रक, पिकअप और अन्य परिवहन साधन |
| जांच का दायरा | अंतरराज्यीय नेटवर्क |
कानूनी आधार: किन धाराओं में कार्रवाई?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में:
- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम
- राज्य गोवंश संरक्षण कानून
- भारतीय दंड संहिता की संगठित अपराध संबंधी धाराएं
- मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित प्रावधान
के तहत कार्रवाई की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
अंतरराज्यीय कनेक्शन और आगे की जांच
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह रैकेट केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है। इसके तार पड़ोसी राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
इसी कारण ओडिशा पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
पुलिस की रणनीति में बदलाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई कानून प्रवर्तन की रणनीति में आए बदलाव को दर्शाती है। अब केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक शक्ति को खत्म करना प्राथमिक लक्ष्य बन गया है।
200 बैंक खातों को फ्रीज करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पुलिस अब संगठित अपराधों पर दीर्घकालिक और प्रभावी प्रहार कर रही है।
निष्कर्ष
गो-तस्करी रैकेट के खिलाफ ओडिशा पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक पुलिस ऑपरेशन नहीं, बल्कि संगठित अपराधों के खिलाफ नीतिगत और रणनीतिक बदलाव का उदाहरण है।
आर्थिक स्रोतों पर चोट कर पुलिस ने यह संदेश दिया है कि अवैध गतिविधियों से अर्जित धन अब सुरक्षित नहीं रहेगा। आने वाले समय में इस कार्रवाई का असर न केवल ओडिशा, बल्कि अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।
— NewsExcel Media | Special Investigative Report

