जयपुर में शक्ति प्रदर्शन: भारतीय सेना की 'भैरव बटालियन' का आधिकारिक पदार्पण
जयपुर | 15 जनवरी, 2026
आज 78वें सेना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर ने भारतीय सैन्य इतिहास के एक नए अध्याय का साक्षात्कार किया। जगतपुरा के महल रोड पर आयोजित भव्य परेड में भारतीय सेना की सबसे आधुनिक और घातक यूनिट, 'भैरव बटालियन' (Bhairav Battalion), ने पहली बार सार्वजनिक रूप से मार्च पास्ट किया।
सैन्य पुनर्गठन (Restructuring) की दिशा में इसे अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। यहाँ इस नई यूनिट और आज के घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
भैरव बटालियन: युद्ध का नया व्याकरण
परंपरागत भारी भरकम बटालियनों के विपरीत, भैरव बटालियन को 'लाइट एंड लीथल' (हल्का और घातक) सिद्धांत पर तैयार किया गया है। यह यूनिट सेना की उस नई सोच का परिणाम है जहाँ संख्या बल से अधिक 'तकनीकी श्रेष्ठता' को प्राथमिकता दी जा रही है।
रणनीतिक विशेषताएँ (Strategic Highlights):
न्यूनतम संख्या, अधिकतम प्रहार: एक सामान्य बटालियन में जहाँ 800 जवान होते हैं, वहीं भैरव बटालियन मात्र 250 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों की एक सुगठित यूनिट है। इसे दुश्मन के पीछे जाकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी त्वरित कार्रवाई करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ड्रोन-आधारित युद्ध (Drone-Integrated Combat): यह भारतीय सेना की पहली ऐसी यूनिट है जो पूरी तरह से 'ड्रोन साक्षर' है। बटालियन की हर टुकड़ी के पास अपने 'कामिकाजे' (आत्मघाती) ड्रोन और टोही विमान (UAVs) हैं।
अश्नी प्लाटून (Ashni Platoons): बटालियन के भीतर इन विशेष प्लाटून्स का काम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और दुश्मन के संचार तंत्र को ठप करना है।
ग्राउंड रिपोर्ट: जयपुर परेड की मुख्य झलकियाँ
सेना दिवस के उपलक्ष्य में जयपुर की सड़कों पर उतरी इस बटालियन ने अपनी विशिष्ट पहचान और अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया:
स्वदेशी मारक क्षमता: बटालियन के जवानों को AK-203 राइफलों, विशेष हेलमेट माउंटेड नाइट विजन और स्वदेशी संचार प्रणालियों से लैस देखा गया।
वॉर-पेंट और गियर: ब्लैक-ग्रे डिजिटल छलावरण (Camouflage) और चेहरों पर युद्ध-पेंट लगाए इन जवानों ने 'अदृश्य, अदम्य' के अपने आदर्श वाक्य को सार्थक किया।
तकनीकी जुगलबंदी: परेड में भैरव बटालियन के साथ रोबोटिक डॉग्स और संजय सर्विलांस सिस्टम ने भी हिस्सा लिया, जो दुर्गम इलाकों में जवानों के लिए 'फोर्स मल्टीप्लायर' का काम करते हैं।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भैरव बटालियन का गठन विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में 'हाइब्रिड वॉरफेयर' से निपटने के लिए किया गया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह बटालियन भारतीय सेना को "भविष्य के युद्धों के लिए तैयार (Future-Ready)" बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
प्रोफेशनल नोट: वर्तमान में ऐसी 15 बटालियनें सक्रिय हैं। इनकी सफलता को देखते हुए आने वाले समय में इनकी संख्या 25 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जो सीधे तौर पर सेना के कमांड मुख्यालयों को रिपोर्ट करेंगी।
क्या आप इस बटालियन की तैनाती के विशिष्ट क्षेत्रों या इनके विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं?
